Mutual Fund Kya Hai In Hindi, म्यूचुअल फंड 2023 हिंदी में benefits

Mutual Fund Kya Hai In Hindi, म्यूचुअल फंड 2023 हिंदी में

जब कोई व्यक्ति शेयर बाज़ार में पहली बार निवेश करना चाहते है तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट लोग उस आदमी को Mutual Fund Kya Hai In Hindi में निवेश करने का सलाह देते है| एक्सपर्ट लोग ऐसा इसलिए बताते है क्योकि म्यूचुअल फंड्स के मेनेजर आपके पैसे को सभी जरुरी चीजे समझ- बुझ कर इस तरीके से कही लगते है या फिर निवेश करते है की आपको अगर नुकसान भी हो तो बहुत कम-से-कम नुकसान हो हो और अच्छा खासा रिटर्न मिल सके| अगर आप शेयर बाज़ार के बारीकियो को समझान चाहते है तो आप सुरु में कुछ समय के लिए  म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगा कर पैसो की घटने या फिर बढ़ने के प्रक्रिया को अछि तरह से समझाना चाहिए|

Table of Contents

इस पोस्ट में हम बात करने वाले है Mutual Fund Kya Hai In Hindi, Mutual Fund कितने प्रकार के होते है, और इसका क्या फायदा है|

म्यूचुअल फंड क्या है? Mutual Fund Kya Hai In Hindi

म्यूचुअल फंड क्या है, म्यूचुअल फंड बेहतर निवेश और उच्च रिटर्न के उद्देश्य से एक पेशेवर फंड मैनेजर द्वारा प्रबंधित धन का एक पूल है|

Mutual Fund Kya Hai In Hindi इसका मतलब है पारस्परिक निधि| इसको थोरा और सरल  भाषा में कहा जाये तो कई लोगो की साझा रकम को  Mutual Fund कह सकते है| दरअसल Mutual Fund में कई लोगो का पैसा एक साथ में मिलकर शेयर बाज़ार या किसी भी निवेश योजना में लगा दिया जाता है| Mutual Fund में आपके साझा पैसे का सामूहिक निवेश किया जाता है| उसका जो भी फायदा होता है, वो सबके निवेश हिस्सों के हिसाब से निवेशक में बाँट कर दे दिया जाता है|

Mutual Fund में निवेश करने वाले लोगो का पैसा कैसे और कहा निवेश करना चाहिए, या एक विशेषज्ञ लोगो की टीम deside करती है| यह टीम एक फण्ड मेनेजर के अधीन कम करती है| इस टीम में शेयर बाज़ार और मार्किट को समझने वाले एक्सपर्ट लोग रखे जाते है| कंपनी और उनके शेयर के पिछले रिकॉर्ड तथा आगे की सम्भावनाये को ध्यान में रख कर के वह टीम लोगो के पैसे को इस तरह से निवेश किया जाता है की उससे कम से कम नुकसान के साथ अच्छा रिटर्न मिले|

इस  तरह से “Mutual Fund” Kya Hai In Hindi आपको बड़ी-से-बड़ी कीमत वाली निवेश कंपनियों में कम पैसे लगा कर निवेश का लाभ प्राप्त करने के लिए  सहूलियत आपको उपलब्ध कराती है|

म्यूचुअल फंड्स में निवेश के कुच्छ उदाहरण, Mutual Fund Kya Hai In Hindi

Mutual Fund Kya Hai In Hindi

कुछ उदहारण के साथ हम आपको Mutual Fund के बारे में समझाने वाले है, मान लीजिये के 50 कलम का एक पैकेट है जिसका कीमत 500 रुपया है| अब आप इस तरह से समझ लीजिये की कोई एक व्यक्ति उस पुरे पैकेट को खरीदने में असमर्थ है या फिर एक साथ में ही उस पुरे पैकेट को खरीदने के लिए इच्छुक नहीं है| ऐसे इस्थिति में 5 लोग मिल कर साझेदारी में उस पैकेट को खरीदने की योजना बनाते है और 100-100 रुपया मिला कर उस पैकेट को खरीद लेते है|

अब  आप ये देखिये की हर व्यक्ति के हिस्से में 10-10 कलम आते है| Mutual Fund को आप इसी  तरह कलम के पैकेट की तरह मान लीजिये और हर कलम को आप एक यूनिट मन सकते है| तो इस तरह से हर व्यक्ति के हिसे में  Mutual Fund की 10 यूनिट आते है| उस 10 यूनिट में उस व्यक्ति का पैसा लगा है अब उन 10 यूनिट से जो रिटर्न मिलेगा वही एक व्यक्ति को लाभ के रूप में रिटर्न मिलेगा|

Mutual Fund से जुरे कुछ प्रमुख सब्द को भी जान लीजिये|

म्यूचुअल फंड यूनिट, Mutual Fund Unit 

Mutual Fund में कई तरह के निवेश उपाए को सामिल किया जाता है, इसमें कई तरह के बांड्स और शेयर भी हो सकते है| साथ ही इसी तरह डेरिवेटिव और ट्रेजरी बिल भी इसमें शामिल हो सकते है| Mutual Fund खिचरी की तरह होती है, ये जो निवेश की खिचरी होती है उस पूरी खिचरी को एक कुछ संख्या में बाँट दिया जाता है| इसमें जो एक हिस्सा होते है वो Mutual Fund के एक इकाई के बराबर यानि की एक यूनिट कहा जाता है|

उदहारण के लिए आप ये समझ लीजिये की एक म्यूचुअल फण्ड ABC है, जिसका stock A में  20%, Stock B में 10%,  Stock C में 20%, Stock D में 5%, government bonds में 30%, cash derivatives में 10%, और treasury bills में 5% लगा है।

अगर जब कोई व्यक्ति को इस म्यूचुअल फण्ड का 1 यूनिट मिलेगा तो वे इन सभी तरह के निवेश अनुपात के हिसाब से स्वामित्व पाने का हक़दार होगा| तथा इससे रिटर्न  मिले-जुले सभी निवेश के प्रदर्शन के आधार पर पाने का हक़दार होंगे|

आप इस तरह से मान लीजिये की एक Mutual Fund यूनिट की कीमत 200 रुपया है, और आपने 2000 रुपया निवेश किया है| तो आपको उस  म्यूचुअल फण्ड की 10 यूनिट का सवामित्व मिल जायेगा|

एसेट मैनेजमेंट कंपनी, Mutual Fund Kya Hai In Hindi

अपने देश भारत में बहुत सारी Mutual fund कंपनी चल रही है| इन Mutual fund कंपनी को Asset Management कंपनी या फिर AMC भी कहते है| AMS, दरअसल, SEBI में ऐसी रजिस्टर्ड कंपनी होती है, जो की mutual fund स्कीम बनाती हैंमुतुआ और लोगों से पैसा जमा करती है। यही कंपनी फण्ड मेनेजर की भी नियुक्त करती है|

म्यूचुअल फंड स्कीम, Mutual Fund Schemes

Mutual Fund Kya Hai In Hindi

म्यूचुअल फंड कंपनी बहुत से mutual fund schemes संचालित करती हैं। सभी स्कीम में निवेश का अलग-अलग लक्ष्य होता है। जैसा की कोई एक स्कीम सिर्फ-और-सिर्फ बड़ी कंपनियों के शेयरों में ही पैसा लगाती है, तो दूसरी सिर्फ छोटी ही कंपनियों में निवेश करती है। तथा कोई तीसरी स्कीम सिर्फ government bonds में ही पैसा लगाती है। इसी तरह से हर कंपनिया अलग-अलग उद्देश्यों वाले कई mutual fund scheme शुरू करती है।

फंड मैनेजर

किसी भी स्कीम में पैसा लगाने की जिमेदारी हर किसी को नहीं दी जाती है, ये जिमेदारी सिर्फ किसी फण्ड मेनेजर को ही दी जाती है| कोई एक व्यक्ति एक से अधिक स्कीम के फण्ड मेनेजर हो सकतें है| किसी एक म्यूचुअल फंड कंपनी या asset management company के पास कई fund managers होते हैं। इसके अलावा, किसी भी कंपनी के पास निवेश की रणनीति जिसे इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पर काम करने के लिए एक अपनी रिसर्च टीम होती है।

एनएवी क्या है, NAV KYA HAI

म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत को Net Asset Value (NAV KYA HAI) कहते हैं। यह Net Asset Value (NAV) ही उस mutual fund scheme की performance को बताता है।

मान लीजिये की आप आज से या फिर भविष्य में mutual fund में निवेश करने के लिए सोचते है| और आप 10 रुपया में NFO Period में एक यूनिट Mutual Fund का खरीदते है|  NFO Period के दौरान इस Mutual Fund की NAV 10 रुपए होगी। अब यह भी मान लेते हैं कि आप ही की तरह और भी 9 लोगों ने Mutual Fund की यूनिट खरीदी है।

इस प्रकार उस म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम ने पुरे 10 यूनिट बेच कर 100 रुपया एकत्रित किये है| इसके बाद अब आपका फण्ड मेनेजर उस 100 रुपया से कुछ शेयर खरीदता है| अब आप ये समझ लीजिये की आपके उस 100 रुपया इन्वेस्टमेंट का कीमत 1 साल के बाद 150 रुपया हो जाता है| अब उस Mutual Fund की हर एक यूनिट का कीमत 15 रुपया हो गया है, और हर यूनिट के नेट एसेट वैल्यू (NAV) 15 रुपया हो गया|

अब अगर दुसरे पांच लोग सेम  scheme में निवेस करना चाहते है, लेकिन अब उस स्कीम की यूनिट का NAV 15 रुपया हो गया है| इसलिए उन्हें अब इसकी 1 यूनिट लेने के लिए  इस यूनिट का वैल्यू 15 रुपए पड़ेंगे। कंपनी अब पाच नए लोगों को 5 Unit बेचकर 75 रुपए और इकट्ठा करती है| दोस्तों अब देखिये कंपनी के पास टोटल निवेशित धन 150+75=225 रुपए। लेेकिन, कुल यूनिटों की संख्या 15 हो गई ।

कोई mutual fund company नई यूनिटें जारी करके निवेश के लिए अपनी रकम (corpus) बढ़ा सकती है। इससे पुराने investors का निवेश प्रभावित नहीं होता। क्योंकि नए  निवेशक को यह नये यूनिट नये भाव ( कीमत ) पर मिलती हैं।

Mutual Fund कंपनिया कभी-कभी कुछ खाश समय-समय पर NAV का घोषणा करते रहती है| आपको अगर किसी भी NAV की जानकारी चाहिए तो आप AMFI Portal या फिर AMCs की websites के जरिये देख सकते है|

NFO या न्यू फंड ऑफर क्या है?

ये म्युचुअल फंड कंपनियां समय-समय पर नई-नई म्यूचुअल फंड स्कीमें लांच करती हैं। market में किसी नई म्यूचुअल फंड स्कीम के लांच करने को new fund offer कहा जाता है। इसको शॉर्ट फॉर्म में NFO कहा जाता है। लगभग सभी नए फंड को कोई न कोई अलग नाम दिया जाता है और साथ ही उसका प्रचार किया/कराया  जाता है। म्युचुअल फंड कंपनियां NFO का विवरण पत्र (prospectus) जिसमे पूरा डिटेल होता है, भी जारी करती हैं। यह विवरण पत्र उस स्कीम के उद्देश्य (objective),  उसकी fund management team और विवरण (details)  के बारे में टोटल जानकरियाँ देता है।

शुरुआत में आप किसी mutual fund scheme की यूनिट 10 रुपए में खरीद सकते हैं। Investment के शुरुआती कुछ समय तक इस Unit की कीमत 10 रुपए ही रहती है। कीमत में बिना बदलाव के Period को NFO Period ( न्यू फण्ड ऑफर पीरियड ) कहा जाता है| इस पीरियड में म्युचुअल फण्ड कंपनी आपके पैसे को किसी भी शेयर में निवेश नहीं करती है| NFO पीरियड जब ख़त्म होता है उसके बाद आपका फण्ड मेनेजर Pooled Money में से इन्वेस्ट करना शुरू करता है| अब यहाँ से जो इस पुरे निवेश की वैल्यू में कमी या बढ़ोतरी होती है, उसीके हिसाब से आपके unit की कीमत में घटोतरी या बढ़ोतरी होती है|

म्युचुअल फंड की कैटेगरी

निवेश और पैसा निकालने की flexibility के हिसाब से म्यूचुअल फंड दो प्रकार के होते हैं।

  1. Open-Ended Mutual Fund Scheme
  2. Close-Ended Mutual Fund Scheme।

खुले सिरों वाली Mutual Fund स्कीम, Open Ended Mutual Fund Scheme

Open Ended Mutual Fund scheme ऐसी स्कीम होती है, जिसमें Invester कभी भी पैसा लगा सकता है और निकाल सकता है। चूंकि ऐसी स्कीम में पैसा आता जाता रहता है इसलिए ऐसी स्कीम के पास कोई  fixed amount नहीं रहता है। फंड मैनेजर को परिस्थितियों के हिसाब से निवेश का फैसला लेना होता है।

बंद सिरों वाली म्यूचुअल फंड स्कीम, Close Ended Mutual Fund Scheme

close ended mutual fund Scheme इस स्कीम में आप सिर्फ NFO ( न्यू फण्ड ऑफर पीरियड ) के समय ही  पैसा लगा सकते हैं। और इसके बाद आप सिर्फ maturity पर ही अपना लगाये हुए पैसा निकाल सकते हैं। हालांकि, close ended mutual fund scheme की यूनिटों को secondary market में खरीदा और बेचा जा सकता है। ऐसे लेन-देन से म्यूचुअल फंड कंपनी का कोई भी लेना-देना नहीं होता है और इसके साथ न ही उस म्यूचुअल फंड scheme की जमा राशी पर इसका कोई प्रभाव पड़ता है।

कोई भी mutual fund Scheme के NFO के पहले AMC को fix तय करना होता है की वह close-Ended Mutual Fund Scheme ला रहा है या फिर Open-Ended Mutual Fund Scheme ला रहा है|

म्युचुअल फंड के प्रकार

निवेश portfolio के आधार पर mutual fund कई प्रकार के होते हैं, mutual funds को SEBI ने 5 भेदों में श्रेणीबद्ध categorized किया है| इसका कुछ परिचय निचे दे रहे है, आप उसे पढ़ कर आसानी से समझ सकते है|

इक्विटी फंड, Equity Fund

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड का पैसा ज्यादातर shares में लगाया जाता है। इस तरह के schemes के फण्ड मेनेजर  को कम से कम निवेश के 65% परसेंट निवेशित रकम शेयर में ही लगाना होता है। बाकी पैसा वह बांड या बैंक में रख सकता है। अब चूंकि इक्विटी म्यूचुअल फंड शेयरों में निवेश करते हैं. तो इनका रिटर्न भी शेयर बाजार के आधार पर मिलता है। यानी कमाई की सबसे ज्यादा संभावना होती है लेकिन रिस्क भी इसमें ज्यादा होता है।

इक्विटी फण्ड से होने वाली Income पर लॉन्ग टर्म कैपिटल gains tax नहीं लगता है, जबकि शोर्ट टर्म कैपिटल  gain को आपके Income में जोड़कर टैक्स कैलकुलेशन में शामिल करते हैं।

डेट (debt) फंड

इस तरह के म्यूचुअल फंड की रकम को मुख्य रूप से कॉर्पोरेट फिक्स्ड deposit और बांड्स में निवेश किया जाता है। किसी डेब्ट  म्यूचुअल फंड के साथ यह अनिवार्य शर्त होती है कि उसका कम से कम 65 प्रतिशत पैसा बॉन्ड या बैंक डिपॉजिट में लगाया जाए। उदाहरण के लिए government bonds, company bonds, corporate fixed deposits और bank deposits वगैरह। बाकी रकम को equity यानी शेयरों में लगाया जा सकता है।

अब चूंकि debt funds को fixed return देने वाले बॉन्ड में लगाया जाता है, इसलिए इनमें risk भी तुलनात्मक रूप से कम होता है। ले किन इनसे आपको जबर्दस्त फायदे की भी उम्मीद नहीं करनी चाहिए। वैसे अच्छे debt funds आपको bank fixed deposits की अपेक्षा बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

अगर आप अपने debt fund को 3 साल बाद भुनाते हैं तो इस पर आपको long term capital gains tax चुकाना पड़ता है। इस long term capital gains tax की दर बिना indexation के 10 प्रतिशत होगी और indexation के साथ 20 प्रतिशत।

अगर आप 3 साल के पहले अपनी डेब्ट  म्यूचुअल फंड  units को बेच देते हैं तो इससे हुई आमदनी पर आपको शोर्ट टर्म कैपिटल gains tax चुकाना पड़ेगा। इस शोर्ट टर्म कैपिटल गेन को आपकी कुल आमदनी में जोड़ा जाएगा और फिर उसके बाद आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स की गणना होगी।

 

बैलेंस्ड म्युचुअल फंड, Balanced Mutual Fund Kya Hai

Balanced Mutual Fund Kya Hai बैलेंस्ड म्यूच्यूअल फण्ड आपके पैसे को बॉन्ड और शेयर दोनों में लगाते हैं। जैसा कि आपको भी मालूम होगा की शेयर में ज्यादा return मिलता है लेकिन वो रिस्की होते हैं लेकिन bond सुरक्षित होते हैं लेकिन उसमें रिटर्न कम मिलता है। इसलिए इन दोनों में पैसे लगाकर ये म्यूचुअल फंड safety के साथ-साथ बढ़िया रिटर्न देने की कोशिश करता है।

बैलेंस्ड म्यूच्यूअल फण्ड, शुद्ध शेयरो में पैसा लगाने वाले इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड से कम return देते हैं, तथा शुद्ध बॉन्ड में पैसा लगाने वाले debt फण्ड कम safe होते हैं। Market के अच्छे समय में ये funds न तो Equity Funds की तरह बहुत ऊंचा रिटर्नदेते हैं और न ही Market के बुरे समय में Equity Funds की तरह ये आपको बहुत खराब return देते हैं।

ये फंड (बैलेंस्ड म्यूच्यूअल फण्ड) निवेश में संतुलित रवैया अपनाते हैं और मार्किट की कंडीशन के हिसाब से बांड और शेयरों में निवेश करते हैं।

भारत में बैलेंस्ड फण्ड  का झुकाव भी इक्विटी यानी शेयरों में निवेश की तरफ ज्यादा दिखता है। ज्यादातर अपने portfolio का निवेशित रकम कम से कम 65 प्रतिशत तक शेयरों में लगाते हैं। ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि tax बचाने में ज्यादा से ज्यादा मदद मिल सके। चूंकि, ऐसे funds, जिनका निवेश, शेयरों में 65 प्रतिशत से अधिक होता है, उन्हें equity mutual funds माना जाता है। ऐसे में इन पर long term capital gains tax लागू नहीं होगा और वे ज्यादा tax benefit उठा सकते हैं।

कुछ और भी ऐसे फण्ड होते हैं, जिन्हें तकनीकी रूप से हाइब्रिड फंड्स या बैलेंस्ड फण्ड कहा जा सकता है, लेकिन म्यूच्यूअल फण्ड कंपनियां उनके नाम के साथ ‘balanced’ शब्द नहीं जोड़तीं।

ये funds अपने Portfolio का 65 प्रतिशत से कम शेयरों में लगाते हैं। इनका शेयरों में निवेश 20 से 30 प्रतिशत हो सकता है। ऐसे funds से होने वाली आमदनी पर long term capital gains tax भी लगता है। भारत में इस तरह के funds मासिक आय योजना (monthly income plans) के रूप में होते हैं। ये आपको हर महीने एक निश्चित आय प्रदान करते हैं। ऐसे Funds आपकी पूंजी की सुरक्षा पर ज्यादा जोर रखते हैं और लगभग निश्चित रिटर्न (fixed return) देते हैं।

 

टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड (ELSS)

Tax Saving Mutual Funds को Equity linked saving scheme या ELSS भी कहा जाता है। चूंकि Equity linked saving scheme या ELSS में लगाए गए पैसे पर सरकार टैक्स छूट देती है, इसलिए इन्हें Tax Saving Mutual Funds कहा जाता है। ये टैक्स बचाने के कुछ सबसे अच्छे उपायों में से एक हैं। ELSS में निवेश किया गया पैसा कम से कम 3 साल के लिए locked हो जाता है। यानी कि आप इनमें लगाया गया पैसा 3 साल के पहले नहीं निकाल सकते।

ELSS का पैसा मुख्य रूप से शेयर में लगाया जाता है, इसीलिए यह आपको अक्सर अच्छा रिटर्न्स दे सकता है| तथा ये अन्य इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स की तरह risky भी होते हैं।

ELSS से section 80C के तहत tax saving होती है। जैसा कि इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी में ऐसे निवेशों को रखा गया है जिनमें पैसा लगाने से आपकी टैक्स देनदारी घट जाती है। इसमें जितना पैसा आप लगाते हैं उतना पैसे आपके टैक्सेबल इनकम से घट जाती  है। NSC, PPF investment, insurance, Home loan principal,  tax saving FD, EPF contribution  और tuition fees वगैरह भी section 80C के तहत टैक्स छूट की सुविधा के हकदार होते हैं।

इन सभी टैक्स सेविंग निवेश में ELSS का लॉक इन पीरियड सबसे कम होता है। इसका मतलब ये है कि अगर आप कम समय के लिए अपना पैसा को जाम करके ज्यादा टैक्स बचाने की सोचते है तो टैक्स सेविंग म्यूच्यूअल फण्ड यानी की ELSS आपके लिए सबसे बेहतर आप्शन हो सकता हैंं।

इंडेक्स फंड, Index Fund

ये फंड भी अन्य इक्विटी फण्ड के तरह शेयरों में पैसा निवेश करता है। लेकिन ये फण्ड इक्विटी फण्ड से अलग इस मायने में होता है कि यह फण्ड  यानि की इंडेक्स फण्ड अपने हिसाब से चुने गए शेयरों में पैसा नहीं लगाता। बल्कि बाजार के सूचकांकों (market indices) के structure की ही copy करके पैसा लगाता है। Sensex, Nifty, CNX-200, CNX 500 वगैरह बाजार सूचकांक हैं।

इन सूचकांकों (indices) में कुछ निश्चित कंपनियों के Share ही शामिल होते हैं। हर शेयर का उस सूचकांक (index) में एक fixed weight-age होता है। कोई Index Fund जिस सूचकांक को Follow करता है, वह उसमें शमिल सभी शेयरों में पैसा लगाता है। शेयरों में पैसा भी उसी अनुपात में लगाया जाता है जिस अनुपात में उन शेयरों को सूचकांक में वजन दिया जाता है।

उदाहरण के लिए आप मान लीजिये की अगर एक इंडेक्स फण्ड है सेन्सेक्स की नकल करता है। तो यह भी सेंसेक्स की तरह ही उन 30 शेयर में ही पैसा लगायेगा। हर शेयर को वह sensex के समान ही weightage भी प्रदान करेगा। यानी कि ऐसे index fund के लिए भी Sensex की तरह reliance, TCS, ITC वगैरह सबसे ज्यादा weightage वाले शेयर होंगे।

Sensex  के पोर्टफोलियो के सेम हूबहू नकल करने के कारण यह इंडेक्स फण्ड सेंसेक्स की तरह ही सेम रिटर्न  भी देगा। हालांकि, index fund से आपको हूबहू वैसे ही Return की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। क्योंकि Copy करने में थोड़ा टाइम लग सकता है। इसे निवेश की भाषा में tracking error कहते हैं। चूंकि इस copycat fund में fund manager यानी म्यूचुअल फंड कंपनी की भूमिका बहुत कम होती है। इसलिए index fund में fund management charge भी काफी कम होता है।आप mutual fund distributor के माध्यम से mutual fund companies से index fund खरीद सकते हैं।

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एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या ETF

Exchange Traded Fund (ETF) मूल रूप से Index Fund ही होते हैं। लेकिन इन index funds को stock exchange में सीधे खरीदा-बेचा जा सकता है। शेयरों की तरह ही exchange-traded fund की कीमत भी बाजार के घंटों (market hours) के दौरान लगातार बदलती रहती है। आप किसी शेयर दलाल (stock broker) से exchange traded fund खरीद सकते हैं। इन्हें खरीदने के लिए, यानी कि इनमें पैसा लगाने के लिए आपको mutual fund distributor की जरूरत नहीं होती।

हेज फंड, Hedge Fund

ये फंड थोड़ा उदार फंड होते हैं। हेज फण्ड किसी रेगुलेशन के तहत बंधन में बंधे नहीं होते। और न ही रिटेल इन्वेस्टर इन फण्ड में पैसा लगा सकत हैं। सिर्फ कुछ सेलेक्ट ग्रुप ऑफ़ हाई नेट वर्थ इन्दिविसुअल्स  ही सामूहिक रूप से hedge funds में निवेश करते है। hedge funds का fund manager भी आक्रामक रणनीति के साथ शेयरों में पैसा लगाता है। hedge funds का fund manager दुनिया में कहीं भी पैसा निवेश कर सकता है।

वह जैसे चाहे वैसे इक्विटी, बांड, गोल्ड या कमोडिटी किसी में भी पैसा लगाए। हेज फंड का फण्ड मेनेजर सिर्फ profit के लिए काम करता है। इस फण्ड में निवेशक आसानी से अपना पैसा नहीं निकाल सकता है। निवेशकों को कम से कम 1 साल के लिए पैसा लगाए रखने को कहा जाता है।

सर्वश्रेष्ठ म्यूचुअल फंड का चुनाव कैसे करें

मेरे ख्याल से अब आप Mutual Fund की बेसिक जानकारियों से परिचित हो गए होंगे। अब अगर आप इनमें Investment का मन बनाते हैं तो आपके अंदर यह जानने की भी इच्छा होगी कि किसी खास Category में सबसे अच्छे या Top 10 Mutual Funds कौन-कौन से हैं। लेकिन, ये काम बहुत आसान नहीं है। किसी Investment Plan के भविष्य के बारे में बिल्कुल सटीक (Exact) जानकारी देना वैसे भी Possible नहीं है। हालांकि हम आपको कुछ ऐसे उपायों (Tools) की संक्षेप में यहां जानकारी दे देते हैं जो आपको Mutual Funds में निवेश के लिए बेहतर Decision लेने में सहायक होंगे।

निवेश के लिए अच्छा फंड मैनेजर चुनें

फण्ड मेनेजर, दरअसल किसी म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के एक ड्राइवर के रूप में होते है। टोटल निवेश को मैनेज करने वाली टीम को फण्ड मेनेजर ही उपयुक्त vision प्रदान करते है। साथ ही आपके निवेश  पर अंतिम रूप से decision लेते है। तो आपको सबसे पहले यह जरूरी है कि आप एक बेहतर और विश्वशनिये फण्ड मेनेजर का चुनाव करें।

पिछले पुरे वर्षों का औसत देखें और साथ हर साल का औसत प्रदर्शन देखते रहे

किसी mutual fund scheme की performance जानने का एक यह भी बेहतर तरीका है कि आप उसकी पिछले कुछ सालों की Performance को चेक कर लें। यहां यह ध्यान रखें कि सिर्फ किसी एक या सिर्फ कुछ खास वर्षों के Record के आधार पर ही Investment का निर्णय न लें। ये आपको Mislead सकते हैं। छोटी अवधि में किसी सुस्त Scheme की परफार्मेंस भी Top पर दिख सकती है। यह दोबारा फिर से खराब Performance दे सकती है।

सबसे अच्छा तो यह होगा कि लंबी अवधि के दौरान उसकी Average Performance को भी देंखें और साल दर साल (Year by Year)  अलग-अलग Performance को भी। अगर वह इस दोनों तरीके से आपको बढ़िया लग रहा हो, तभी आप अपना पैसा उसमें लगाने का निर्णय लें।

इसका एक आसान Method हम यहां बता रहे हैं। साल की कोई एक तारीख चुन लीजिए। मान लिया यह 30 नवंबर है। अब पिछले हर साल के 30 नवंबर को उस mutual fund scheme का NAV देख लीजिए। अब गणना कर लीजिए कि हर साल उसके NAV में कैसी बढ़ोतरी हो रही है। इस बढ़ोतरी को benchmark index से मिलान करिए। अगर यह benchmark index से बेहतर है तो इस स्कीम में निवेश किया जा सकता है।

रिस्क की कैटेगरी भी चेक करें

आपको mutual fund की Risk Category से भी परिचित होना चाहिए। आपके mutual fund को Market के किसी उतार या चढाव पर बहुत तेज प्रतिक्रिया (Reaction) वाला नही होना चाहिए। किसी स्कीम की रिस्क  केटेगरी जानने के लिए आप उस टाइम अवधि पर नजर डालें, जबकि मार्केट में तेजी से बदलाव हुए हों। देखें कि मार्केट के साथ साथ उस म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम के NAV में किस तरह के बदलाव हुए हैं। क्या यह Market के उतार-चढ़ाव से ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा रहा है? अगर हां, तो आपको इससे दूर रहना ही बेहतर है।

प्रोफेशनल फंड हाउस का ही चयन करें

किसी Professional Fund house के माध्यम से Mutual Fund में पैसा लगाना भी समझदारी भरा होता है। एक अच्छा और professional fund house के पास अपनी एक अच्छी research team भी रखता है। ये टीम कुछ श्रेष्ठ मानकों (Standards) के आधार पर अच्छे शेयरों का चयन करती है। इसका फायदा यह होता है कि आपके Investment की Performance किसी एक व्यक्ति के कंपनी में होने या न होने पर आश्रित (Depend) नहीं रहती। ऐसे फंड हाउस का fund manager अगर कभी बीच में उसे छोड़कर चला भी जाता है तो फण्ड हाउस की टीम, स्थिति को संभालने के लिए तैयार होती है।

FAQs

1. म्यूचुअल फंड निकालने का न्यूनतम समय क्या है?

म्यूचुअल फंड निवेश पर हमेशा लंबी अवधि के लिए विचार करना चाहिए। अगर हमें किसी खास तारीख पर पैसे की जरूरत है तो हमें उससे कम से कम पांच से छह महीने पहले पैसा निकालना शुरू कर देना चाहिए।

2. क्या मैं कभी भी म्यूचुअल फंड तोड़ सकता हूँ?

ओपन एंड स्कीम में निवेश को किसी भी समय भुनाया जा सकता है। जब तक यह इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में निवेश नहीं है, जिसमें निवेश की तारीख से 3 साल का लॉक-इन है, निवेश मोचन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

3. मैं म्यूचुअल फंड से कितनी बार निकासी कर सकता हूं?

म्यूचुअल फंड तरल संपत्ति हैं, और जब तक आप ओपन-एंड योजनाओं में निवेश करते हैं, चाहे वे इक्विटी हों या ऋण, किसी भी समय अपना निवेश निकालना आसान होता है। इसके अलावा, कोई प्रतिबंध नहीं हैं

4. क्या म्यूचुअल फंड निकासी कर योग्य है?

म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन पर टैक्स 2023

प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक कर-मुक्त है। 1 अप्रैल 2023 से, सभी पूंजीगत लाभ पर निवेशक की आयकर स्लैब दर पर कर लगाया जाएगा। प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक कर-मुक्त है। 1 अप्रैल 2023 से, सभी पूंजीगत लाभ पर निवेशक की आयकर स्लैब दर पर कर लगाया जाएगा

5. म्यूचुअल फंड के लिए क्या हैं नए नियम?

नए म्यूचुअल फंड नियम 1 अप्रैल 2023 से लागू हो रहे हैं। विवरण जांचें
इक्विटी उन्मुख योजना जिसमें न्यूनतम 65% इक्विटी हो।
35% से अधिक इक्विटी वाली योजनाओं पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगाया जाएगा।
35% से अधिक लेकिन 65% से कम इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड, इंडेक्सेशन के लिए पात्र हैं और उन पर 20% कर लगाया जाएगा।

तो दोस्तों ये थी म्यूचुअल फंड्स के बारे में हिंदी में जानकारी। मै आशा करता हु की मेरा ये पोस्ट आपको अच्छा लगा होगा|

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